Thursday, 29 December 2016

जरा सोचें - एक अनकही कहानी

जरा सोचें - एक अनकही कहानी

अमन अपने कॉलेज में; final year में पढ़ता था।
और वो हमेशा की तरह आये दिन ही मस्ती करता रहता था।
कभी वो अपने junior की ragging करता तो कभी वो अपने कॉलेज की लड़कियों पर भद्दे comments करता।
तो कभी वो किसी लड़की को एकटक होकर घूरता ही रहता।
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खैर; अब उसके कॉलेज की लड़कियों को भी अमन का ये behaviour normal लगने लगा था।
लेकिन जब college में कोई नई लड़की आती तो उसे अमन का ये behaviour बड़ा ही अजीब लगता।
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उसके बारे में सब यही कहते कि ये कब सुधरेगा..??
कोई भला इंसान उसे समझाता भी; तो अमन और उसके दोस्त मिलकर; उसी का मजाक बना देते।
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उसके teachers भी उसकी इन हरकतों से परेशान थे, वो भी कहते कि इस लड़के का कुछ नहीं हो सकता..!!!
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खैर; समय का पहिया घूमते देर नहीं लगती।
ठीक एक बार फिर से समय का पहिया घूमा और अमन की वो loafer type life; change हो गयी।
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सबसे पहले अमन की family से मिलते हैं।

अमन अपनी family के साथ इंदौर में रहता है।और अमन की family में पांच लोग है।
अमन, अमन की माँ, पिता,और दो बहनें; जिनमें से एक की शादी हो चुकी है जो दिल्ली में रहती है जबकि दूसरी बहन उसी की हमउम्र ही है।
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अमन रोजाना की तरह थका हरा अपने college से घर पहुँचा।
घर पहुँचकर उसका चेहरा खिल गया था क्योंकि उसने खुशख़बरी ही कुछ ऐसी सुनी थी।
दरअसल अमन की बड़ी बहन को लड़की हुई थी।
जब उसकी मां और बहन ने अमन को ये खुशखबरी सुनाई तो वह खुशी के मारे उछल पड़ा।
क्योंकि अब उसकी भांजी दुनियां में आ चुकी थी और वह मामा बन चुका था।
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अब अमन को अपनी भांजी का चेहरा देखने की बहुत जल्दी थी।
तो अमन उसी दिन; इंदौर से दिल्ली जाने की जिद करने लगा।
उसकी माँ ने भी; उसे मना नहीं किया लेकिन उन्होंने भी शर्त रख दी कि छोटी बहन को भी साथ ले जाना पड़ेगा।
अमन इस बात पर राजी नहीं हो रहा था क्योंकि वो अकेला ही जाना चाहता था।
माँ के बार-बार बोलने पर उसने हाँ कर दी।
और वो दोनों शाम की train से दिल्ली के लिए रवाना हो गए।
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Train में बहुत भीड़ थी; जिस वजह से उन्हें सीट नहीं मिल पाई।
आगे के स्टेशन पर एक व्यक्ति उनकी birth से उतरा तो सीट पर एक व्यक्ति की जगह खाली हो गई थी जिस पर अमन ने अपनी बहन को बैठा दिया।
और खुद train में खड़ा रहा।
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अचानक अमन की निगाह एक लड़के पर गई जो उसकी बहन को घूर रहा था और वह लड़का ठीक उसी सीट के सामने बैठा था जिस पर अमन की बहन बैठी थी।
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2 मिनट बाद अमन ने फिर देखा लेकिन वह लड़का फिर भी अमन की बहन को घूरे जा रहा था; अमन को ऐसी गुस्सा आ रही थी कि वो उसकी आँखे नोंच ले।
लेकिन फिर भी उसने अपने गुस्से पर काबू किया।
अमन भी एक लड़का था इसलिए वो भाँप गया कि आगे चलकर ये लड़का कुछ ना कुछ हरकत जरूर करेगा।
इसलिए अमन की नजरें उस लड़के की प्रत्येक हरकतों की निगरानी करने लगी थीं।

और अमन ने जो सोचा वो सही निकला अब तो उस लड़के ने हद ही कर दी; ऊपर बैग रखने के बहाने खड़ा हुआ और अपना मोबाइल निकालकर अमन की बहन का फोटो ले लिया।
फोटो लेते समय वो भूल गया कि उसकी flashlight on थी।
अमन ने ये सब देख लिया और उसे पास बुलाते हुए बोला कि भाई फोटो अभी delete कर दे; ठीक रहेगा।
लेकिन वो समझ रहा था कि उसे फोटो लेते हुए किसी ने नहीं देखा तो वह अकड़ते हुए बोला :- फोटो...??? नहीं तो...!!! ये आप क्या बोल रहे हो..??
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अमन ने उसका मोबाइल छुड़ा लिया और फोटो delete करते हुए बोला कि ये क्या था...??
उस लड़के के पसीने छूट गए और माफ़ी मांगते हुए बोला कि गलती हो गई।
खैर; अमन ने उसे माफ़ कर दिया।
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अब वो लड़का अमन की बहन से तो दूर; खुद से नजर नहीं मिला पा रहा था।
वो उस डिब्बे से निकलने के बहाने खोजने लगा था क्योंकि अब वो समझ चुका था कि अब उसकी दाल नहीं गलने वाली।
जैसे ही अमन की नजर उस पर जाती ; उसका चेहरा शर्म से लाल हो जाता।
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खैर, अमन ने यहाँ तो एक भाई होने का फर्ज निभा दिया लेकिन फिर भी वो कहीं न कहीं खुद को guilty feel कर रहा था।
इसलिए नहीं कि उसने उस लड़के को फटकार लगाई; बल्कि इसलिए कि college में वो ऐसा खुद करता था।
अब अमन human behaviour को समझने लगा था; उसने जाना कि किस तरह लड़कियों के घर वाले उन्हें कॉलेज भेजते हैं और किस तरह हम जैसे loafer उनकी नजरें झुका देते हैं।
शायद हम जैसे loafer की वजह से ही कुछ लोग अपनी बेटियों को college में admission कराने से डरते हैं; वो डरते हैं कि हमारी बेटी college में पहुंचकर उन लोफरों का सामना कैसे करेगी..??
शायद हमारी वजह से ही कुछ काबिल लड़कियाँ कॉलेज में admission नहीं ले पातीं।
इन सबके दोषी हम जैसे लड़के ही हैं।
अमन को आत्मबोध हो चुका था और मन ही मन उसने अपना एक status सा बना डाला कि "अब मेरी नजरों की इतनी औकात नहीं कि कभी घूर सके किसी लड़की को; हमेशा याद रहेगा कि खुदा ने एक बहिन मुझे भी दी है।"
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और इस तरह अमन ने खुद की वो loafer type life change कर डाली।
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Friends, अक्सर ऐसा हम भी करते हैं ; जब हम घर से दूर जाते हैं तो अपनी family को भूल जाते हैं, और दूसरों की family हमें आवारा लगने लगती है फिर हम अपने दोस्तों के साथ मिलकर; किसी की भी बहिन, बेटी पर कुछ भी comments दे मारते हैं।
लेकिन जब खुद की बहिन की बारी आती है तो हम बौखला जाते हैं!!!
आखिर क्यों...???
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कुछ लोगों ने college का पर्याय ही मौज-मस्ती बना लिया है।
समझते हैं कि अब घरवालों ने उन्हें मौज-मस्ती का licence दे दिया हो।
खैर; मैं ये नहीं कहता कि college में आकर; मौज-मस्ती बिल्कुल भी ना करो।
अरे भाई करो; लेकिन उतनी ही; कि अगर किसी लड़की के घरवालों को पता भी चल जाए तो वो बौखला ना उठें।
बाकी तो आप खुद समझदार हो।☺
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ये article आपको कैसा लगा...??
कृपया अपने comments के माध्यम से अवश्य बताइयेगा।
जय हिंद।
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