Thursday, 29 March 2018

अगर कोई आपको अपशब्द कहे तो ये जवाब दें!!

हैलो दोस्तो,
ये दुनियाँ बहुत बड़ी है, यहीं अच्छे लोगों का वास होता है तो बुरे लोगों का भी।
आदमी के संस्कार ही उसे अच्छा या बुरा बनाते हैं।
एक दिन की बात है रमेश और सुनील में किसी बात को लेकर बहस हो गई।
और बहस इतनी बढ़ी कि रमेश, सुनील को गालियाँ भी देने लगा।
सुनील ने उसे समझाया कि देख भाई तू मुझे गाली मत दे; ठीक रहेगा।
इस पर रमेश का पारा और गर्म हो गया और बोलने लगा कि मैं गालियाँ ही दूँगा, देखता हूँ तू क्या कर लेगा।
ऐसा बोलकर रमेश और तीखी यानी कि मां-बहन की भी गालियाँ देने लगा।
सुनील ने खुद पर धैर्य बनाये रखा और उसे फिर से समझाते हुए बोला कि देख भाई - माँ, बहिन की गालियाँ मुझे भी आती हैं लेकिन मैं नहीं दे रहा वो अलग बात है।
इस पर रमेश बोला; तू मुझे गालियाँ देकर तो देख; पता चल जाएगा।
इस पर सुनील बोला; i am sorry लेकिन मैं आपकी mom को गालियाँ नहीं दे सकता।
रमेश - हिम्मत होगी तब देगा ना।
सुनील - हिम्मत की बात नहीं है रमेश!! मैं भी तेरी mom को गाली दे सकता हूँ और तू ज्यादा से ज्यादा क्या करेगा मुझे 4 थप्पड़ लगाएगा तो 2 थप्पड़ मैं भी लगा सकता हूँ??
लेकिन इससे कुछ हासिल नहीं होगा।
बल्कि मैं आपकी माँ जी को गाली देकर अपने ही संस्कार खराब करूँगा।
आप मुझे गालियाँ दे रहे हो ये आपके संस्कार हैं और मैं नहीं दे रहा तो ये मेरे संस्कार हैं।
अगर तुम अब भी सोच रहे हो कि मैं तुमसे डरकर; तुम्हारी माँ को गालियाँ नहीं दे रहा तो तुम बिल्कुल गलत सोच रहे हो।
रमेश; सुनील की बातों को सुनता ही रह गया अब वो सुनील को क्या जवाब दे? ये उसे समझ ही नहीं आया।
और इस तरह सुनील ने बिना गाली दिए ही रमेश की बोलती बंद कर दी।
तो friends, अगर तुम्हें कोई अपशब्द बोलता है तो तुम्हें अपना आपा खोकर अपशब्द नहीं बोलना चाहिए बल्कि सुनील की तरह जवाब देकर उस गाली देने वाले की बोलती बंद कर देनी चाहिए।
और अगर आप भी अपशब्द बोलते हो तो please, इस post से कुछ सीखिए और आज से ही अपशब्द ना बोलने की प्रतिज्ञा लीजिये।
जय हिन्द।

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Thursday, 22 February 2018

होली पर विचार

हमें किसी भी त्यौहार की याद तब आती है जब वो सर पर होता है।
अब हमें ही देख लो होली के कुछ दिन बाकी है तभी मुझे होली पर ब्लॉग लिखने का विचार आया।😊 लेकिन आया तो सही।
अब अपने भारत के कुछ लोग तो ऐसे हैं जिन्हें होली का विचार आने के बाद भी उसे नजरअंदाज कर देते हैं। और होली एक बुरा त्यौहार है ये अपने मन को करार दे देते हैं।
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यही सोच तो है आजकल हम युवाओं की, जो होली नहीं खेलते हैं, सोचते हैं कि कपड़े खराब हो जाएंगे और भी कई नुकसान होंगे। और किसी शख्स ने भी उनके मन के अंदर ये wrong number डाल दिया कि आजकल होली कोई नही खेलता इससे कई प्रकार के नुकसान हैं।
और फिर अपने कपड़े बिगड़ने के डर से वो होली ना खेलते हुए अति गंभीर और बोरिंग जिंदगी जीते हैं। और कुछ लोग तो ऐसे भी हैं जो होली वाले दिन घर से बाहर भी नहीं निकलते, फिर होली निकल जाती है और बावजूद उनका त्यौहार होने के, वो इसका आनंद नही उठा पाते।
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भाई हम गंभीर तो हर वक़्त ही रहते हैं लेकिन खुशी के मौके पर जब कोई गंभीर हो जाये तो वो बाकी लोगों की खुशी भी छीन लेता है।
भले ही आपको होली खेलने का कोई शौक ना हो लेकिन अपने इस त्यौहार को जीवंत रखने के लिए ये जरूरी है कि थोड़ा गुलाल दूसरे को और थोड़ा खुद को भी लगवाएं।
और हां मुंह सिकोड़ कर नहीं बल्कि चेहरे पर एक गजब सी मुस्कान देकर।
आपका ये छोटा सा कदम बच्चों को खुश करने के साथ ही साथ आपको अपने अंदर से आत्मीयता सुख का अहसास कराएगा।
इसीलिए दोस्तों होली में कपड़े खराब होगें ये सोचकर खुद को होली खेलने से रोको मत बल्कि होली खेलने से हम चार लोगों के चेहरों पर खुशी देखेंगे ये सोचकर सबसे पहले होली खेलने आप ही आगे आओ।
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तो दोस्तों मैं तो जमकर होली खेलने वाला हूँ, अगर आप भी हमारे साथ हो तो comment लिखकर हमें अवश्य बताएं और बताएं कि आपको होली पर मेरा ये विचार कैसा लगा।
जय हिंद।

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